Skip to main content

Posts

Showing posts with the label economy

20 अप्रैल से ग्रामीण इलाकों में शुरू होगा कामकाज, खुलेंगे 900 उद्योग - सुशील मोदी

News:  सुशील मोदी जोकि बिहार के उपमुख्यमंत्री है उन्होंने रविवार को ट्विटर के माध्यम से कहा कि कोरोनावायरस जिस तेजी से दुनिया भर में पैर पसार रहा है वह भयावह है। अभी तक दुनिया भर में 23 लाख से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। एवं लगभग  डेढ़ लाख व्यक्तियों की इससे मौत हो चुकी है अमेरिका में जो की होती शक्तिशाली देश है वहां इस वायरस की वजह से 38244 लोगों की मौत हुई है एवं स्पेन में 20042 नागरिकों की जान गई है इतना ही नहीं कई देश ऐसे भी है जहां लाशों को दफनाने के लिए ही जगह कम पड़ गई। बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक ओर जहां दुनिया के शक्तिशाली देश इस महामारी से हार गए वहीं दूसरी ओर भारत में स्थितियां संभली हुई है प्रधानमंत्री मोदी ने सही समय पर लुक डाउन करने का फैसला लिया जो की प्रसिद्ध प्रशंसनीय है इस लॉक डाउन के फैसले ने भारत को इस महामारी से काफी हद तक बचा लिया है अब तक के आंकड़े देखें तो 130 करोड़ जनसंख्या के हमारे देश में अभी तक केवल 507 लोगों की मौत हुई है एवं 2230 संक्रमित व्यक्तियों को सफलता के ...

आरबीआई ने लिया रिवर्स रेपो रेट घटाने का फैसला, 3.75 फीसदी हुई रिवर्स रेपो रेट

News:  शुक्रवार को आरबीआई ने कई बड़े अहम फैसले लिए। अपने एक फैसले में आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में कमी करने का फैसला लिया ताकि बैंकों के पास नकदी ज्यादा हो। शशिकांत दास जो कि आरबीआई के गवर्नर है उन्होंने ऐलान किया है कि आरबीआई रिवर्स रेपो रेट में तत्काल कमी कर रही है। रिवर्स रेपो रेट को 0.25 फ़ीसदी की कमी की है। इसी के चलते रिवर्स रेपो रेट 3.75 फ़ीसदी हो गई है। किसे कहते है रिवर्स रेपो रेट? पूरे दिन भर के ट्रांजैक्शन के बाद बैंक जो रकम आरबीआई में डिपॉजिट करते हैं उन पर मिलने वाला ब्याज रिवर्स रेपो रेट के अनुसार तय किया जाता है। RBI ने जारी किया TLTRO का दूसरा फेज Reserve Bank of India ने NBFC को बड़ी आसानी से फंड मुहैया कराने के लिए आज Targeted Long term repo operations (TLTRO) की दूसरी किस्त जारी की है। बताया जा रहा है कि यह फंड 50,000 करोड़ रुपए का होगा जो अलग अलग फेज में किया जाएगा। RBI अनुमान के गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि इस फंड का निवेश NBFC के बॉन्ड, CP, NCD में किया जाएगा। फंड के कुल 50,000 करोड़ रुपए में से 25,000 करोड़ रुपए का निवेश कि...

Covid-19 Impact: 40 दिन के लॉक डाउन से 40 साल पीछे गई देश की अर्थव्यवस्था

News:  विश्व भर में फैली कोरोना महामारी की वजह से सभी देश खौफ में है। भारत में भी यह संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने 21 दिन का लॉक डाउन घोषित किया था। जिसके खत्म होने के बाद इस लॉक डाउन के समय को अब और अधिक बढ़ा दिया गया है। और अब यह 40 दिन का लॉक डाउन हो गया है। बताया जा रहा है कि लॉक डाउन की वजह से अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। पूरे साल भर अर्थव्यवस्था में सुस्ती छाई रहेगी। ऐसा लगभग 40 साल बाद हुआ है की अर्थव्यवस्था पूरे साल कमजोर रही हो। एक जानी-मानी इकोनॉमिस्ट सोनल वर्मा के अनुसार बिजनेस स्टैंडर्ड ने यह लिखा है कि पहले इस लॉक डाउन का समय केवल 21 दिन था लेकिन अब इसे बढ़ाकर 40 दिन कर दिया है। जिससे कि इकोनॉमी में डायरेक्ट आउटपुट लॉस 8 फ़ीसदी से भी ज्यादा होने की संभावना है। सोनल वर्मा का यह अंदाजा है कि 2021 फिस्कल ईयर में देश की जीडीपी घटेगी और 0.4 फ़ीसदी रह जाएगी। वहीं दूसरी ओर सोसाइटी जनरली GSC के अनुसार फिसकल ईयर 2021 में जीडीपी घटकर 0.01% रहेगी। अर्थव्यवस्था में इतनी ज्यादा कमजोरी 1980 में देखने को मिली थी जब देश की जीडीपी में 5....

जानिए लॉक डाउन की वजह से कौन से सेक्टर्स को हुआ ज्यादा नुकसान

News:  देश में लॉक डाउन के पहले चरण का अंत 14 अप्रैल को हुआ तथा उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने लॉक डाउन के दूसरे चरण का ऐलान कर दिया। लॉक डाउन की अवधि को बढ़ाकर 3 मई तक कर दिया गया है। अगर देखा जाए तो 24 मार्च से लेकर 3 मई तक कुल मिलाकर 40 दिन का लॉक डाउन रहा। इस दौरान लगभग सभी फील्ड में भारी नुकसान हुआ। कई इंडस्ट्रीज, फैक्ट्री पूरी तरीके से बंद रही। व्यापार पूर्ण रूप से ठप्प रहा। लॉक डाउन की वजह से जिन सेक्टर पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ा है वह यह है:- ऑटोमोबाइल ऑटोमोबाइल के इस सेक्टर में लॉक डाउन से कुछ समय पहले ही मंदी चल रही थी। क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन पर कुछ हद तक रोक अपने आप लग गई थी। लोग ज्यादा सफर करने से बच रहे थे और वाहन की खरीद से भी। लेकिन इसी बीच सरकार द्वारा लगाया लॉक डाउन ने ऑटोमोबाइल की हालत और ज्यादा खराब कर दी। अप्रैल में गाड़ियों की खरीद में बहुत ज्यादा गिरावट देखी गई। और आने वाले कुछ महीनों में भी इसमें कोई तेजी आने के आसार नहीं लग रहे हैं। अब अगर यह महामारी नहीं थमेगी तो कुछ कहा नहीं जा सकता कि यह संकट कब तक बना रहे। अब उम्मीद की जा रही है कि इस साल सितंबर,...

Covid-19 Impact : कब तक होगी इकोनॉमी में रिकवरी, अंदाजा लगा पाना नामुमकिन- गीता गोपीनाथन

News:  गीता गोपीनाथन जो कि IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट है उन्होंने CNBC- TV18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि दुनिया के लगभग सभी देशों में कोरोना महामारी की वजह से लॉक डाउन कर दिया गया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि बहुत सी कंपनियों में रॉ मटेरियल की सप्लाई नहीं हो पाई है जिसकी वजह से प्रोडक्ट नहीं बना सके और मार्केट में डिमांड एवं सप्लाई में असंतुलन हो गया है। गीता गोपीनाथन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि विश्व भर में फैली यह कोरोना महामारी अब कब तक बनी रहेगी इसका अंदाजा लगा पाना नामुमकिन है। यह एक ऐसा संकट है जिससे दुनिया पहली बार देख रही है और इसी वजह से हमारे पास ऐसा कोई ऐतिहासिक आंकड़े भी नहीं है जिसको इस्तेमाल करके हम इसके थमने का अनुमान लगा सके। कोरोना का यह संकट बिल्कुल एक अलग तरह का संकट है जिसको जड़ से खत्म करने के लिए हमें बड़े वित्तीय पैकेज की जरूरत पड़ेगी। CNBC TV18 को दिए अपने साक्षात्कार में गीता ने कहा कि अब सभी को इस बात का भी खौफ है कि यह संकट टलने के बाद दुनिया के सभी देश अपने आपको पहले रिकवर करने की सोचेंगे। सभी आत्म केंद्रित हो जाएंगे इससे निपटने के ब...

Covid-19 Impact: लॉकडाउन की नई गाइडलाइंस में बैंक व एटीएम पर क्या होगा असर

News:  देश में कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या को बढ़ते देख पीएम मोदी ने 21 दिन के लोग डाउन के बाद इसकी अवधि 3 मई तक कर दी है। सरकार ने लॉक डाउन बढ़ाने के बाद ही इससे जुड़ी सभी जानकारी दे दी है। देश में कोरोना वायरस का संक्रमण दिनों दिन बढ़ता जा रहा है और अब तक देश में इससे संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 11,439 तक हो गई है। इसका देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है। और साथ ही जनता को भी बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने संक्रमण की गंभीरता एवं देश की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस लॉक डाउन के सात दिनों तक कड़ी पाबंदी लगाने का फैसला लिया है। 7 दिन बाद यानी कि 20 अप्रैल से कुछ राहत मिलेगी। 20 अप्रैल से खेती का कार्य शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी तथा कुछ इंडस्ट्रीज में भी कामकाज शुरू होगा। वहीं दूसरी ओर बैंक और एटीएम की बात करें तो नई गाइडलाइंस के अनुसार बैंक, एटीएम, कैपिटल और डेट मार्केट जिस तरह पहले खुला करते थे वैसे ही खुलेंगे। इसके अलावा बैंक एवं एटीएम से जुड़ी जानकारी के लिए आरबीआई ने भी कुछ नोटिफिकेशन जारी किए हैं। RBI और RB...

फैक्टरियों में काम होगा शुरू, मजदूरों के लिए बनेगा टाउनशिप जोन

News:  देश में कोरोना संक्रमण के फैलने की वजह से 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशभर में 21 दिन का संपूर्ण लॉक डाउन घोषित किया गया था। लॉक डाउन का समय पूरा होने में अभी 1 दिन बाकी है। लॉक डाउन के खत्म होने के बाद क्या किया जाना चाहिए इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने पहले ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर ली है। संभावना जताई जा रही है कि यह लॉक डाउन का समय और बढ़ाया जाएगा लेकिन इस पर अभी तक किसी प्रकार का कोई ऐलान नहीं हुआ है। इस बैठक में ज्यादातर मुख्यमंत्रियों ने लॉक डाउन को बढ़ाने के पक्ष में अपनी सहमति जताई है। जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि लॉक डाउन का समय निश्चित रूप से बढ़ेगा। और यह भी संभावना है कि आज मुख्यमंत्री लॉक डाउन बढ़ाने पर कोई फैसला ले। News 18 ने सरकारी सूत्रों के अनुसार बताया है कि लॉक डाउन के इस दूसरे फेज में पहले फेज की तरह सब कुछ बंद नहीं किया जाएगा। इस बार कुछ आर्थिक कार्यों को करने की छूट दी जाएगी ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर इसका ज्यादा असर ना दिखे। #  क्या है सरकार का प्लान? सूत्रों के अनुसार सरकार ...

उद्योग मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स समेत 15 इंडस्ट्रीज को कुछ शर्तों के साथ कामकाज की छूट देने मांग की

News:  बता दें कि गृह मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों से सुझाव मांगे हैं कि लॉक डाउन को खोला जाए या नहीं। ऐसे में उद्योग मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से सिफारिश की है कि ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक के साथ 15 इंडस्ट्रीज को कामकाज करने की छूट दी जाए। उद्योग मंत्रालय ने यह भी कहा कि कामकाज की छूट देने के साथ अगर कुछ शर्ते रखी जाती है तब भी वह मानने के लिए तैयार है। हालांकि अभी तक उनकी इस मांग पर किसी भी प्रकार का कोई फैसला नहीं लिया गया है। दूसरी ओर गृह मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों को संदेश लिखकर सिफारिश की है कि लॉक डाउन के दौरान जो पुरानी छूट दी गई थी उसे सख्ती से बहाल किया जाए। उद्योग मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में करीब 15 सेक्टर में कंपनियों को कामकाज की छूट की सिफारिश की है। इन 15 सेक्टर में ऑटो, सीमेंट, इलेक्ट्रॉनिक, स्टील मिल आदि शामिल है। उद्योग मंत्रालय ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इन सभी सेक्टर की कंपनियों को एक शिफ्ट में 20 से 25 फ़ीसदी की क्षमता के साथ काम करने दिया जाए। वही एक्सपोर्ट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को भी बहुत सावधानी के साथ खोला जाना चाहिए। इसी के साथ दूसरे कई सेक्टर जै...

World bank: कोरोना वायरस की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था को लगेगा बड़ा झटका

News:  रविवार को वर्ल्ड बैंक ने अपने बयान में कहा कि भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलने से लॉक डाउन किया गया है। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट आएगी। इतना ही नहीं वर्ल्ड बैंक का यह भी कहना है कि देश की आर्थिक वृद्धि दर में भी बड़ी गिरावट आ सकती है। विश्व बैंक (World Bank) ने South Asia Economic Update : Impact of COVID-19 में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2019-20 में भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट घटकर 5 फीसदी रह जाएगी। इसके साथ ही देश में वस्तुओं की डिमांड और सप्लाई में इंबैलेंस की वजह से 2020-21 में भी ग्रोथ रेट घट कर 2.8 फीसदी रह जाएगी। इस रिपोर्ट में विश्व बैंक ने यह भी कहा है कि कोरोना वायरस का संक्रमण भारत में ऐसा समय लाया है जब भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरीके से कमजोर पड़ गई है। भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता दिख रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने लॉक डाउन का एक बहुत ही अच्छा निर्णय लिया जिसकी वजह से देश में स्थितियां अभी संभली हुई है। देश भर में 24 मार्च से लगाकर 14 अप्रैल तक यानी कि 2...

G20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भारत ने की क्रूड कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने की वकालत

News:  भारत के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने G-20 देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में कहा एनर्जी बाजार में स्थिरता बनी रहनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि क्रूड कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहिए। इस बैठक कि अध्यक्षता सऊदी अरब ने की। इस बैठक में धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा की भारत दुनिया भर के लिए ऊर्जा केंद्र बना रहेगा। सरकार के उज्ज्वला योजना के तहत ग्राहकों को फ्री LPG सिलेंडर देने से देश में एलपीजी की डिमांड में बढ़ोतरी हुई है। इस बैठक में सरप्लस क्रूड निर्माण में कमी करने के लिए भी चर्चा हुई है। इसके साथ ही इस बात पर भी सहमति बनी कि टास्क फोर्स का गठन किया जाना चाहिए, क्योंकि यह टास्क फोर्स मौजूदा समय में जो स्थितियां बन रही है उनमें G-20 मंत्रियों को सलाह देगा तथा सभी स्थितियों का आकलन करके एक सफल रणनीति बनाने में ऊर्जा मंत्रियों की मदद करेगा। अपनी बात में धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि क्रूड कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना बहुत ही ज्यादा आवश्यक है। विश्व भर में चल रहे कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए G-20 ऊर्जा मंत्रियों ने इस अहम बैठक ...

Covid-19 pandemic: ADB देगा भारत को 2.2 अरब डॉलर का सपोर्ट पैकेज

News:  शुक्रवार को एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रेसिडेंट मसात्सुगू असाकावा (Masatsugu Asakawa) ने भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को विश्वास दिलाया कि एडीबी भारत को कोरोना वायरस से निपटने के लिए मदद करेगा। एडीबी के प्रेसिडेंट ने आश्वस्त किया कि वह भारत को 2.2 अरब डॉलर (16500 करोड़ रुपए) का सपोर्ट पैकेज देंगे। एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रेसिडेंट मसात्सुगू असाकावा (Masatsugu Asakawa) ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत सरकार ने सही समय पर सही निर्णय लिए और कोरोना वायरस को फैलने से रोक कर रखा। जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार ने कोरोना वायरस से जंग में काफी प्रयास किए हैं। सरकार ने इस महामारी से जंग जीतने के लिए नेशनल हेल्थ इमरजेंसी प्रोग्राम, कारोबारियों और उद्यमियों के लिए टैक्स में कमी करके बहुत ही प्रशंसनीय कदम उठाए हैं। 26 मार्च को सरकार ने लॉक डाउन की वजह से शिकार हुए देश के गरीब, मजदूरों को तुरंत आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से लगभग 23 अरब डॉलर के आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की। ADB के प्रेसिडेंट का यह भी कहना है कि एडीबी भारत की आपात जरूरतों को पूरा करने के लिए...

सरकार को इकोनॉमी के लिए देना होगा ₹10 लाख करोड़ का पैकेज

News:  देश को महामारी से बचाने के लिए सरकार ने लॉक डाउन का बड़ा अहम फैसला लिया जो कि काफी हद तक सही है। लेकिन इस लॉक डाउन की वजह से देश की इकोनॉमी को बहुत ही ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। इसकी वजह से कई लोग बेरोजगार हो गए हैं। इन स्थितियों में अगर देश कोरोना से जंग जीत जाता है तब भी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है उन हजारों लोगों की रोजीरोटी की है जिनकी नौकरी लॉक डाउन की वजह से चली गई है बड़े-बड़े इकोनॉमिस्ट और बिजनेस लीडर्स का कहना है कि सरकार को ऐसे लोगों के लिए 10 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देना होगा। वित्त मंत्रालय के पूर्व चीफ इकोनामिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि इस महामारी से लड़ने के लिए और जीतने के लिए और सरकार को इस महामारी से हुए नुकसान से उबरने के लिए 10 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे जो कि देश के जीडीपी का 5 फ़ीसदी है। इसके साथ ही वित्त मंत्रालय के पूर्व चीफ इकनोमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि सरकार कैसे अगले 1 साल तक अपने अतिरिक्त खर्च के लिए फंड जुटा सकती हैं। इसमें कई तरीके के उपाय दिए हैं, जिसमें डेट मोनेटाइज करने से लगा...

कोरोना से निपटने के लिए सरकार ने 15000 करोड़ के आर्थिक पैकेज का किया ऐलान

News:  देश में तेजी से फैल रहे कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने 21 दिन का लॉक डाउन घोषित किया है। सरकार इस महामारी से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मौजूदा हालात में जैसी स्थितियां देश में बन रही हैं उनको देखते हुए देश के हेल्थ सिस्टम को और अच्छा करने के लिए सरकार ने 15,000 करोड रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है। बताया जा रहा है कि इसमें से लगभग आधा फंड इमरजेंसी जैसे हालात से निपटने के लिए खर्च किया जाएगा जबकि बाकी आधा फंड अगले 4 साल में मिशन मोड के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने हाल ही में कुछ जरूरी मेडिकल इक्विपमेंट्स जैसे कि वेंटिलेटर, टेस्टिंग किट, मास्क और पीपीई जैसी चीजों पर और इनको बनाने के लिए लगने वाले रॉ मटेरियल पर से कस्टम ड्यूटी, इंपोर्ट ड्यूटी तथा हेल्थ सेट को हटाने का फैसला लिया है, ताकि इनके दाम कम हो सके और आमजन तक यह वस्तुएं आसानी से पहुंच सके। आने वाली 30 सितंबर तक इन वस्तुओं पर किसी प्रकार का कोई इंपोर्ट शुल्क या हेल्थ सेस नहीं लिया जाएगा। सरकार ने यह आर्थिक पैकेज इमरजेंसी रिस्पांस और हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए दिया है। सर...

IMF चीफ ने कहा- 2020 की मंदी, 1930 की महामंदी से भी ज्यादा भयावह है

News: देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलते देख किए गए लॉक डाउन की वजह से देश को व्यापार में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। इसी पर आईएमएफ यानी कि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड चीफ ने कहा है कि 2020 की मंदी 1930 की महामंदी से भी बहुत ज्यादा भयावह सिद्ध होगी। आईएमएफ की हेड क्रिस्टलीना जॉर्जीवा (Kristalina Georgieva) ने कहा कि इन हालातों को देखते हुए लगता है कि अब 2021 में ही कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण के फैलने से कुछ हफ्ते पहले ही सामाजिक व आर्थिक असर देखे जा रहे थे। इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए दुनिया भर की सरकारें 8 लाख करोड रुपए से ज्यादा का पैकेज दे चुकी है। लेकिन अब भी स्थिति को काबू में लाने के लिए और फंड की आवश्यकता पड़ रही है उनका कहना है कि मुसीबतों की इस घड़ी में सबसे बुरा हाल इमर्जिंग मार्केट और डेवलपिंग कंट्रीज का होगा। तथा इनमें सुधार लाने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर की आवश्यकता पड़ेगी IMF चीफ ने कहा, "सिर्फ तीन महीने पहले तक हम अपने 160 मेंबर देशों में प्रति व्यक्ति इनकम में इजाफे की उम्मीद कर रहे थे। अब 170 स...

सप्लाई में सुधार, किसानों को राहत: किसानों से सीधे फसल खरीद सकेंगे बल्क बायर

News: देश में चल रहे लॉक डाउन की वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि अपनी फसल को बाजार में लाने के लिए किसानों को कोई भी ट्रांसपोर्ट फैसिलिटी नहीं मिल रही है, जिससे कि उनकी फसल गोदाम में पड़े पड़े खराब हो रही है। इसी के तहत सप्लाई चैन में आई रुकावट को दूर करने के लिहाज से कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों में बल्क बायर्स, रिटेलर्स, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को ये निर्देश दिए है की वे सीधे किसानों से फसल खरीदे। यही तरीका अपनाकर सप्लाई चैन में आई रुकावट को दूर किया जा सकता है तथा किसानों की मुसीबत को भी हल किया जा सकता है। इसलिए कृषि मंत्रालय ने सभी बड़े रिटेलर, बल्क बायर एवं फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को किसानों से सीधे फसल खरीदने के लिए अनुमति दे दी है। इससे बड़ी रिटेल कंपनियों, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों को भी फायदा हो सकता है। इसकी मंजूरी देने के लिए कृषि सचिव ने सभी राज्यों को चिट्ठी लिखकर इस बात के लिए मांग की है। कृषि सचिव ने अपनी बात में कहा है कि सभी राज्य सरकारें अगले 3 महीने तक इस व्यवस्था को बनाए रखें, क्योंकि ऐसा करने से दो काम आसान होंगे। पहला यह कि सभी राज्यों ...

Covid-19 pandemic: लॉक डाउन के चलते फल किसानों को ₹7000 करोड़ का नुकसान

News: पूरे विश्व में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा रखा है। पूरी दुनिया में फैला कोरोनावायरस अब भारत में भी फैल रहा है। क्योंकि इस संक्रमण को ठीक करने के लिए अब तक कोई टीका या दवा नहीं बनी है इसलिए सभी इससे डरे हुए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा देश में लॉक डाउन कर दिया गया है क्योंकि बचाव ही एकमात्र उपाय है। और लॉक डाउन की वजह से देश की इकोनॉमी की तो जैसे कमर ही टूट गई हो। बिजनेस के हर सेक्टर में स्थितियां गड़बड़ा गई है और हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। कोरोना वायरस ने फल किसानों को बहुत ही तगड़ा झटका दिया है। क्योंकि देश में लॉक डाउन है तो ट्रांसपोर्ट पूरी तरीके से बंद है ऐसे में फल किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। हर वर्ष किसानों के लिए मार्च और मई का महीना बहुत ही अच्छा होता है, क्योंकि इन महीनों में किसान अपना माल लेकर थोक बाजार में जाते हैं और काफी अच्छा फायदा मिलता है और फिर वहां से उपभोक्ताओं तक फल पहुंचते हैं। लेकिन इस साल ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और किसानों के फल सड़ रहे हैं। महाराष्ट्र के जलगांव जिले के एक फल किसान वैभव महाजन कहते हैं कि हम केलों की आपूर्ति करने के लिए बिल्कुल...