News: गीता गोपीनाथन जो कि IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट है उन्होंने CNBC- TV18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि दुनिया के लगभग सभी देशों में कोरोना महामारी की वजह से लॉक डाउन कर दिया गया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि बहुत सी कंपनियों में रॉ मटेरियल की सप्लाई नहीं हो पाई है जिसकी वजह से प्रोडक्ट नहीं बना सके और मार्केट में डिमांड एवं सप्लाई में असंतुलन हो गया है।
गीता गोपीनाथन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि विश्व भर में फैली यह कोरोना महामारी अब कब तक बनी रहेगी इसका अंदाजा लगा पाना नामुमकिन है। यह एक ऐसा संकट है जिससे दुनिया पहली बार देख रही है और इसी वजह से हमारे पास ऐसा कोई ऐतिहासिक आंकड़े भी नहीं है जिसको इस्तेमाल करके हम इसके थमने का अनुमान लगा
सके। कोरोना का यह संकट बिल्कुल एक अलग तरह का संकट है जिसको जड़ से खत्म करने के लिए हमें बड़े वित्तीय पैकेज की जरूरत पड़ेगी।
सके। कोरोना का यह संकट बिल्कुल एक अलग तरह का संकट है जिसको जड़ से खत्म करने के लिए हमें बड़े वित्तीय पैकेज की जरूरत पड़ेगी।
CNBC TV18 को दिए अपने साक्षात्कार में गीता ने कहा कि अब सभी को इस बात का भी खौफ है कि यह संकट टलने के बाद दुनिया के सभी देश अपने आपको पहले रिकवर करने की सोचेंगे। सभी आत्म केंद्रित हो जाएंगे इससे निपटने के बाद दुनिया में सभी देश संरक्षणवाद की भावना से गिर जाएंगे। लेकिन सभी वजहों के बावजूद वैश्वीकरण के लिए हम सदैव आगे की ओर कदम बढ़ाएंगे। इस संकट से निपटने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
गीता का कहना है कि अभी तक भारत ने IMF से किसी भी वित्तीय सहयोग के लिए बातचीत नहीं की है। उनका कहना है कि भारत ने सही समय पर सही निर्णय लिए और बहुत अच्छे से अपनी प्रायोरिटी डिसाइड की। सरकार ने इस महामारी से निपटने के लिए सही कदम उठाए हैं। और देश के गरीब तबके को सीधे सहायता पहुंचाई है। उम्मीद है कि सरकार अपनी इस सहायता को बड़े पैमाने पर लेकर जाएगी।

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