News: पूरे विश्व में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा रखा है। पूरी दुनिया में फैला कोरोनावायरस अब भारत में भी फैल रहा है। क्योंकि इस संक्रमण को ठीक करने के लिए अब तक कोई टीका या दवा नहीं बनी है इसलिए सभी इससे डरे हुए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा देश में लॉक डाउन कर दिया गया है क्योंकि बचाव ही एकमात्र उपाय है। और लॉक डाउन की वजह से देश की इकोनॉमी की तो जैसे कमर ही टूट गई हो। बिजनेस के हर सेक्टर में स्थितियां गड़बड़ा गई है और हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। कोरोना वायरस ने फल किसानों को बहुत ही तगड़ा झटका दिया है। क्योंकि देश में लॉक डाउन है तो ट्रांसपोर्ट पूरी तरीके से बंद है ऐसे में फल किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है।
हर वर्ष किसानों के लिए मार्च और मई का महीना बहुत ही अच्छा होता है, क्योंकि इन महीनों में किसान अपना माल लेकर थोक बाजार में जाते हैं और काफी अच्छा फायदा मिलता है और फिर वहां से उपभोक्ताओं तक फल पहुंचते हैं। लेकिन इस साल ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और किसानों के फल सड़ रहे हैं।
महाराष्ट्र के जलगांव जिले के एक फल किसान वैभव महाजन कहते हैं कि हम केलों की आपूर्ति करने के लिए बिल्कुल तैयार हैं, लेकिन इन केलों को शहर के बाजार तक ले जाने के लिए कोई ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं मिल पा रही। उनका यह भी कहना है कि केले के दामों में भी काफी गिरावट आ गई है। पिछले दो हफ्तों में इन दामों में 60 फ़ीसदी की गिरावट आई है। लेकिन फल बाजार में नहीं पहुंच पा रहे इसलिए कोई खरीदार भी नहीं मिल पा रहा।
जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र के जलगांव जिले में पूरे देश में सबसे ज्यादा केले की खेती होती है। फलों के साथ तकरीबन 45,000 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन है।
इस लॉक डाउन के दौरान फलों के दामों में तेजी से उछाल देखा गया है। ऐसे में बिचौलिए सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। सभी जगह किसान अपने फलों को बेचने के लिए बहुत ही ज्यादा कोशिश कर रहे हैं और ट्रक वाले भी केले जैसे फल को ले जाने के लिए मना कर रहे हैं। अगर अभी के हालातों को देखें तो छोटे किसानों को ज्यादा नुकसान हुआ है क्योंकि उन्होंने खेती के लिए लोन लिया है और अब क्योंकि खरीदार नहीं मिल रहे हैं तो उनके पास इतने पैसे भी नहीं आ रहे हैं कि वे लोन को चुका सके।
जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र के जलगांव जिले में पूरे देश में सबसे ज्यादा केले की खेती होती है। फलों के साथ तकरीबन 45,000 हेक्टेयर खेती योग्य जमीन है।
इस लॉक डाउन के दौरान फलों के दामों में तेजी से उछाल देखा गया है। ऐसे में बिचौलिए सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। सभी जगह किसान अपने फलों को बेचने के लिए बहुत ही ज्यादा कोशिश कर रहे हैं और ट्रक वाले भी केले जैसे फल को ले जाने के लिए मना कर रहे हैं। अगर अभी के हालातों को देखें तो छोटे किसानों को ज्यादा नुकसान हुआ है क्योंकि उन्होंने खेती के लिए लोन लिया है और अब क्योंकि खरीदार नहीं मिल रहे हैं तो उनके पास इतने पैसे भी नहीं आ रहे हैं कि वे लोन को चुका सके।
और यह स्थिति केवल केला उत्पादक किसानों की ही नहीं है। सभी प्रकार के फल किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं। महाराष्ट्र के अमरावती जिले के किसानों को संतरे बेचने में भी कई तरह की मुश्किलें झेलनी पड़ रही है। अमरावती जिले के एक संतरा किसान उत्पादक से हुई बात में उनका कहना है कि कुछ समय पहले संतरे की कीमतें ₹35 प्रति किलोग्राम थी लेकिन अब वह घटकर ₹15 प्रति किलोग्राम पर आ गई है और उस क्षेत्र में सभी किसानों के संतरो को मिलाकर लगभग 1000 टन से ज्यादा संतरे हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट की सुविधा ना होने से यह फल गोदाम में ही पड़े हुए है। हालांकि संतरो की शेल्फ लाइफ 2 हफ्ते की होती है अगर इतने समय के अंदर ही संतरे की बिक्री नहीं की गई तो ये फल गोदाम में ही पड़े पड़े सड़ जाएंगे और किसानों को भारी नुकसान होगा।
अधिक जानकारी के लिए बता दें कि संतरे कई यूरोपीय देशों को भी निर्यात किए जाते हैं। चूंकि लॉक डाउन के चलते निर्यात की सुविधा बंद हो गई है। अगर इसी तरह के हालात बने रहे तो संभावना है कि दो हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
अमरावती जिले के ही पास एक क्षेत्र है विदर्भ जो कि किसानों की आत्महत्या के लिए देशभर में बहुचर्चित है। लेकिन अमरावती ऐसी जगह है जहां पर कोई नुकसान होने पर किसान आत्महत्या जैसा कठोर कदम नहीं उठाते। लेकिन इस बार हालात बदलते दिख रहे हैं। किसानों को हुए गंभीर नुकसान के बाद उनके हालात यह है कि वह बैंक से लिया लोन भी नहीं चुका पाएंगे। ऐसे में डर है कि अमरावती के किसान भी आत्महत्या जैसा कदम ना उठा ले।
अमरावती जिले के ही पास एक क्षेत्र है विदर्भ जो कि किसानों की आत्महत्या के लिए देशभर में बहुचर्चित है। लेकिन अमरावती ऐसी जगह है जहां पर कोई नुकसान होने पर किसान आत्महत्या जैसा कठोर कदम नहीं उठाते। लेकिन इस बार हालात बदलते दिख रहे हैं। किसानों को हुए गंभीर नुकसान के बाद उनके हालात यह है कि वह बैंक से लिया लोन भी नहीं चुका पाएंगे। ऐसे में डर है कि अमरावती के किसान भी आत्महत्या जैसा कदम ना उठा ले।
कुछ इसी प्रकार के हाल अंगूर और सेब के फल उत्पादक किसानों का भी है। कुछ अंगूर, केला, सेब, संतरा उगाने वाले किसान तो अपनी फसलों को फेंक रहे हैं क्योंकि लॉक डाउन के चलते फल खराब हो चुके हैं। इस कोरोना वायरस के चलते हुए लॉक डाउन ने फल किसानों को बहुत ही तगड़ा झटका दिया है और बहुत ज्यादा नुकसान किया है।

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