News: देश को महामारी से बचाने के लिए सरकार ने लॉक डाउन का बड़ा अहम फैसला लिया जो कि काफी हद तक सही है। लेकिन इस लॉक डाउन की वजह से देश की इकोनॉमी को बहुत ही ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। इसकी वजह से कई लोग बेरोजगार हो गए हैं। इन स्थितियों में अगर देश कोरोना से जंग जीत जाता है तब भी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है उन हजारों लोगों की रोजीरोटी की है जिनकी नौकरी लॉक डाउन की वजह से चली गई है बड़े-बड़े इकोनॉमिस्ट और बिजनेस लीडर्स का कहना है कि सरकार को ऐसे लोगों के लिए 10 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देना होगा।
वित्त मंत्रालय के पूर्व चीफ इकोनामिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि इस महामारी से लड़ने के लिए और जीतने के लिए और सरकार को इस महामारी से हुए नुकसान से उबरने के लिए 10 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे जो कि देश के जीडीपी का 5 फ़ीसदी है।
इसके साथ ही वित्त मंत्रालय के पूर्व चीफ इकनोमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि सरकार कैसे अगले 1 साल तक अपने अतिरिक्त खर्च के लिए फंड जुटा सकती हैं। इसमें कई तरीके के उपाय दिए हैं, जिसमें डेट मोनेटाइज करने से लगाकर आरबीआई से कर्ज लेने तक के उपाय शामिल है।
वहीं दूसरी ओर लाइव मिंट के अनुसार, सुभाष चंद्रा जो कि इकोनामिक अफेयर्स डिपार्टमेंट के पूर्व सचिव है, उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि "इस लॉक डाउन की वजह से करीब 10 करोड़ लोगों का रोजगार चला गया है और यह लोग अपनी रोजी रोटी पा सके, इसके लिए सरकार को ऐसे लोगों के लिए आने वाले 3 महीने तक हर महीने ₹2000 देने चाहिए"।
गर्ग का कहना है कि "सरकार ने पहले नॉन वर्कर को राहत पैकेज देने की घोषणा की थी क्योंकि लॉक डाउन के बेहद गंभीर परिणाम होंगे। क्योंकि गरीब मजदूरों, कर्मचारियों के बेरोजगार होने के बाद हम उन्हें उनकी सेविंग पर ही जिंदगी को आगे चलाने के लिए नहीं छोड़ सकते"। उनका यह भी कहना है कि सरकार को व्यापार को चलाने के लिए भी राहत पैकेज लाना चाहिए जो कि जीडीपी का 2 फ़ीसदी यानी कि 4 लाख करोड रुपए का होना चाहिए। मंगलवार को गर्ग ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि मात्र 21 दिन के लॉक डाउन के दौरान देश में दो तिहाई प्रोडक्शन का नुकसान हुआ है। अगर इसकी गणना करें तो देश को ₹8 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है।
फिक्की जो कि एक इंडस्ट्री बॉडी है, उसका कहना है कि सरकार को जितना जल्दी हो सके 9 से 10 लाख करोड रुपए का राहत पैकेज देना ही चाहिए। फिक्की के डायरेक्टर दिलीप चिनॉय का कहना है कि सरकार को इस फंड का इस्तेमाल गरीबों को आर्थिक मदद देने के लिए, देश की इकोनॉमी को फिर से संभालने के लिए तथा एमएसएमई को सपोर्ट करने के लिए करना चाहिए। साथ ही सुब्रमण्यम और गर्ग दोनों का यह मानना है कि सरकार अभी बाजार से बिल्कुल भी पैसा नहीं ले सकती और अब एक ही उपाय है कि वह RBI से कर्ज ले।
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