News: हाल ही में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट ने एक टिप्पणी की है। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई में की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के नियमों के अनुसार फैसला सुनाया। क्या था यह मामला? कोर्ट ने क्या टिप्पणी करीं? एवं मामले के संबंध में क्या आदेश दिए? शिक्षक भर्ती में आरक्षण के क्या नियम है? जानिए विस्तार से...
यह मामला देश के ऐसे राज्य का है जहां पिछले करीब 20 साल से सरकारी शिक्षक भर्तियों में एक निश्चित वर्ग को ही 100 फ़ीसदी आरक्षण दिया जा रहा था। यह आरक्षण पाने वाला वर्ग है शेड्यूल्ड ट्राइब यानी कि अनुसूचित जनजाति एवं उस राज्य का नाम है आंध्र प्रदेश।
जनवरी 2000 में, आंध्र प्रदेश में एक आदेश जारी हुआ था इस आदेश के मुताबिक राज्य के जितने भी जनजातीय क्षेत्र के सरकारी स्कूल है उनमें सिर्फ एसटी वर्ग यानी कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों को ही शिक्षक की नौकरी दी जाती है।
इस मामले में कोर्ट ने अपनी टिप्पणी करी। अब 20 साल बाद जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा इस पर पांच जजों की एक बेंच ने सुनवाई की जस्टिस अरुण मिश्रा के अध्यक्षता वाली बेंच ने 1994 के मंडल आयोग के आदेश के बारे में बताते हुए कहा कि 'फाउंडिंग फादर्स ने भी कभी सभी सीटों पर आरक्षण के लिए नहीं कहा था। केवल 50 फ़ीसदी आरक्षण को ही नियम बनाया गया था। लेकिन कुछ विशिष्ट मामलों में बिना किसी लापरवाही के साथ 50 फ़ीसदी आरक्षण की सीमा को बढ़ाया जा सकता है'।
कोर्ट का यह कहना था कि, '100 फीसदी आरक्षण देना हर प्रकार से अनुचित, अतर्कसंगत, असंवैधानिक और गैर-कानूनी है। ऐसा करना बिल्कुल ग़लत है। यह एक मनमानी हरकत है, जिसकी अनुमति संविधान के तहत नहीं दी गई है। जनजातीय क्षेत्रों में 100 फीसदी आरक्षण देने का कोई मतलब नहीं बनता। ट्राइबल्स को सिर्फ ट्राइबल टीचर ही पढ़ा सकते हैं.. ये एक बहुत ही निंदनीय सोच है। अन्य वर्ग के स्थानीय लोग क्यों नहीं पढ़ा सकते?'
कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए 152 पन्नों का एक फैसला लिखा इसमें कोर्ट ने यह कहा है कि 'मानते हैं कि भारत के स्वतंत्रता के अब 72 साल हो चुके हैं लेकिन उसके बाद भी समाज के निचले तबके तक सभी लाभ नहीं पहुंच पाए हैं अनुसूचित जनजाति और अन्य जनजातियों को आगे बढ़ाने के लिए ही आरक्षण का प्रावधान लाया गया था लेकिन देशभर में कुछ चुनिंदा जगहों पर अगर हम उन्हें 100 फ़ीसदी आरक्षण देने लगेंगे तो देश के अन्य जगहों पर रहने वाले ट्राईबल्स के अधिकारों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा एवं वह भी इसका विरोध कर सकते हैं।'
सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत ही अच्छा फैसला लेते हुए इस मामले में कहा कि आंध्र प्रदेश का साल 2000 का आदेश जिसमें अनुसूचित जनजाति वर्ग को 100 फ़ीसदी आरक्षण देने की बात कही कोर्ट के द्वारा अमान्य करार दिया जाता है।

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