News: गुरुवार को फ्रेंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड (Franklin India Templeton Mutual Fund) ने अपनी डेट स्कीम्स (Debt Schemes) में से छह स्कीम्स को पूर्ण रूप से बंद करने की घोषणा करी। इन सभी स्कीम्स का एसेट बेस 25856 करोड़ रुपए है। इन्हें बंद करने की वजह कंपनी ने कोरोनावायरस के फैलते संक्रमण के कारण हुए लॉक डाउन को बताया। कंपनी ने अपने एक बयान में कहा कि मौजूदा समय में जो संकट का दौर चल रहा है इसमें निवेशकों ने बड़ी तेजी से पैसे निकाले हैं एवं इसकी वजह से कंपनी को पैसों की तंगी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड की ने स्कीम्स जो बंद होने वाली है उन म्यूचुअल फंड स्कीम्स के नाम है:--
(1) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन लो ड्यूरेशन फंड (Franklin India Low Duration Fund)
(2) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन शॉर्ट बॉन्ड फंड (Franklin Ultra Short Bond Fund)
(3) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन शॉर्ट टर्म इनकम प्लान (Franklin Short Term Income Plan)
(4) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन क्रेडिट रिस्क फंड (Franklin Credit Risk Fund)
(5) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन डायनामिक एक्यूरियल फंड (Franklin Dynamic Accrual Fund)
(6) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन इनकम ऑपरच्यूनिटी फंड (Franklin Income Opportunities Fund)
(2) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन शॉर्ट बॉन्ड फंड (Franklin Ultra Short Bond Fund)
(3) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन शॉर्ट टर्म इनकम प्लान (Franklin Short Term Income Plan)
(4) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन क्रेडिट रिस्क फंड (Franklin Credit Risk Fund)
(5) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन डायनामिक एक्यूरियल फंड (Franklin Dynamic Accrual Fund)
(6) फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन इनकम ऑपरच्यूनिटी फंड (Franklin Income Opportunities Fund)
फ्रेंकलिन इंडिया टेम्पलटन (Franklin India Mutual Fund) ने अपने जारी किए एक बयान में कहा है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से निवेशकों ने काफी तेजी से पैसे निकाले हैं। एवं कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी यानी कि नकदी की बहुत ज्यादा तंगी हो गई है। इसके साथ ही फिक्स्ड इनकम फंड स्कीम में भी तेजी से म्यूच्यूअल फंड्स में पैसे निकाले हैं। इसलिए काफी सोच-विचार कर यह निर्णय लिया गया है कि इन छह स्कीम्स को बंद किया जाए।
इन स्थितियों के बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि देशभर के करीब 22 लाख करोड रुपए की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर म्यूच्यूअल फंड से पैसे निकालने का दबाव अप्रैल में बहुत तेजी से बढ़ गया है। और फ्रैंकलीन इंडिया टेंपलटन का यह निर्णय निवेशक को सोचने पर मजबूर करेगी। ऐसे में निवेशक दूसरे अन्य फंड्स में भी और तेजी से पैसे निकाल सकते हैं।
क्या करना चाहिए निवेशकों को ?
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि ऐसी स्थितियों में जब स्कीम्स अचानक बंद कर दी जाती है तब निवेशकों के लिए पैसा निकालना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। जब तक कि म्यूचल फंड कंपनी अपने सारे होल्डिंग्स को खत्म करके पैसा जटा नहीं लेती तब तक निवेशक पैसे नहीं निकाल सकते।
निदेशकों को एक बात जानना बहुत जरूरी है कि 23 अप्रैल, 2020 को जब इन फंडों की कट ऑफ टाइम चल रही हो ऐसी स्थिति में कोई भी खरीदारी नहीं कर पाएगा और साथ ही इसमें से पैसे अभी निकाल नहीं पाएगा। तो अगर आपने किसी फंड में पैसा लगाया है, तो इसका मतलब यह है कि आप रिडीम नहीं कर सकते। आपका पैसा और आपका निवेश इन फंडों में बंद है जब तक कि फंड हाउस आगे से भुगतान नहीं करता। और अगर आपको किसी भी प्रकार की कोई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा हो तो इसके लिए आप बाजार नियामक सेबी के पास अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। जब सेबी को आपकी शिकायत मिलती है तो वह खुद ही इस मामले को इससे जुड़ी म्यूचल फंड कंपनी के पास ले जाता है और इसका हल होने तक फॉलोअप लेता रहता है।
इतना ही नहीं हाल ही में आरबीआई यानी कि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने कार्य क्षेत्र में लोकपाल ओं को एक नया भार सौंपा है। इस नई जिम्मेदारी में इंश्योरेंस पॉलिसी या फिर म्यूचल फंड स्कीम जैसे थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स जैसे जुड़ी सभी शिकायतें सुनने का अधिकार भी है।

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