News: हर तरफ कोरोना का हाहाकार मचा हुआ है एवं देश की जनता इसके संक्रमण से डरी हुई है। ऐसे में हर कोई इससे बचने का हर उपाय कर रहा है। चाहे वह मास्क हो या फिर हेल्थ, हाइजीन का ध्यान रखना हो। लेकिन पिछले कुछ दिनों में मास्क की डिमांड इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि दुकानों में मास्क ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे। ऐसे समय में जब मास्क लगाना अत्यंत आवश्यक हो गया है तब मास्क की कमी ना हो इसके लिए छोटे स्टार्टअप ने इनोवेशन करके बहुत ही कम दाम में लोगों को मास्क उपलब्ध कराए हैं। सिर्फ ₹10 में कोरोना से बचने के लिए मास्क मिल रहे हैं तथा 10 मिनट में कोरोना की जांच भी हो रही है। और यह काम बड़ी-बड़ी कंपनियों ने नहीं बल्कि छोटे-छोटे स्टार्टअप ने कर दिखाया है देशभर में छोटे स्टार्टअप ने ऐसे कई इनोवेशंस किए हैं जिससे कि कोरोना से बचने में काफी मदद मिल रही है।
कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलने से हर कोई सचेत हो गया है तथा इससे बचने के लिए हर प्रयास कर रहा है। कोरोना की वजह से बाजार में जिस प्रोडक्ट की सबसे ज्यादा कमी आई है वह है मास्क। हालात ऐसे हैं मानो दुकानों में मास्क खत्म ही हो गए हो। मुश्किल के इस दौर में इसका समाधान ढूंढ निकाला है आईआईटी दिल्ली के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप नैनोक्लीन ग्लोबल ने। इस छोटे स्टार्टअप ने एक प्रोडक्ट बनाया है जिसका नाम है nasofilter। यह एक प्रकार का मास्क है जिसमें नैनो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है और इसे आसानी से मुंह पर पहना जा सकता है। इसकी खास बात यह है कि इसकी कीमत केवल ₹10 है और इस नए इनोवेशन से इस छोटे से स्टार्ट पिछले 1 महीने में ₹5 करोड़ से भी ज्यादा का मुनाफा कमाया है।
इसी तरह का एक और इनोवेशन देश में देखा गया है। मध्य प्रदेश के नीमच का स्टार्टअप EtechRobot 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी को यूज करके हेल्थ केयर से जुड़े प्रोडक्ट बना रहा है। इनमें फेस शिल्ड अहम है जिसे मास्क के तौर पर पहना जा सकता है। इस स्टार्टअप के बनाए फेस शिल्ड को स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को बांटा गया है
छोटे स्टार्टअप्स द्वारा मास्क तो बनाए ही गए है लेकिन बंगलुरु के एक स्टार्टअप बायोन ने एक ऐसा होम किट बनाया है जो सिर्फ 10 मिनट में कोरोना की जांच करता है तथा 10 मिनट के अंदर ही नतीजे भी बता देता है। इस तरह यह स्टार्टअप कोरोना से जंग जीतने में मदद कर रहा है। इसके अलावा भी कई और स्टार्टअप्स है जो अपने स्तर पर नए इनोवेशन से लोगों को कम दाम में होम किट या मास्क उपलब्ध करा रहे हैं। इसी तरह का एक और स्टार्टअप है Staqu जिसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस एक ऐसा थर्मल कैमरा बनाया है जो बिना किसी व्यक्ति के कोरोना के मरीजों की पहचान कर सकता है तथा रियल टाइम अलर्ट भी जारी कर सकता है। और इस कंपनी ने गुड़गांव और नोएडा प्रशासन के साथ मिलकर इस काम को शुरू भी कर दिया है।
इसी तरह के स्टार्टअप्स में एक और स्टार्टअप का नाम आता है जो है मोबिलिटी स्टार्टअप Revv जो कि अपनी 1000 गाड़ियां हेल्थकेयर वर्कर को चलाने के लिए दे रहा है वह भी बिना किसी फीस के। कंपनी यह सुविधा देश के 5 बड़े शहरों में उपलब्ध करा रही है। इसके लिए हेल्थकेयर वर्कर को केवल अपना आईडी कार्ड दिखाना है और वह Revv की गाड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
कोरोना वायरस से लड़ने का जुनून छात्रों में भी देखा जा रहा है। आईआईटी रुड़की के छात्रों ने बहुत ही कम दाम वाला एक वेंटिलेटर बनाया है जिसकी कीमत केवल ₹25000 है। इसका नाम रखा गया है प्राणवायु। इस वेंटीलेटर में कंप्रेस्ड एयर की कोई जरूरत नहीं होती और यह वेंटीलेटर उस समय के लिए बेहतरीन हैं जब किसी वार्ड को आईसीयू में बदला जाता है।
करना वायरस की वजह से स्टार्टअप का बिजनेस और उसकी फंडिंग भी बहुत प्रभावित हुई है लेकिन बावजूद इसके यह छोटे-छोटे स्टार्टअप कोरना से लड़ने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं एवं एक योद्धा की तरह अपना कार्य कर रहे हैं।

Comments
Post a Comment