News: पिछले कुछ दिनों से यह खबर काफी चर्चा का विषय रही की क्या सरकार सरकारी कर्मचारियों की इंसेंटिव्स काटने वाली है। इनमें एलटीसी, मेडिकल और छुट्टी के बदले पैसा जैसे कई इंसेंटिव सामने आ रहे थे। हाल ही में इस खबर पर सरकार की फैक्ट चेक ट्विटर हैंडल PIB Fact Check ने ट्वीट किया है कि सरकार ने ऐसा कोई भी फैसला अभी तक नहीं लिया है। और नहीं वह ऐसा करने की सोच रही है। ट्वीट में यह साफ कहा गया है कि इस प्रकार की खबरों को अफवाह ही समझे उन्होंने निश्चित किया कि सभी से कर्म सरकारी कर्मचारियों को यह इंसेंटिव मिलते रहेंगे।
वित्त मंत्रालय ने अपनी एक बयान में कहा है कि यह सारी खबरें अफवाह है। वित्त मंत्रालय ने पीआईबी फैक्ट चेक की एक रिपोर्ट को शेयर करते हुए लिखा है कि "LTC, मेडिकल रीइंबर्समेंट और लीव एनकैशमेंट यानी की छुट्टी के बदले पैसा जैसी सभी इंसेंटिव में किसी भी प्रकार की कोई कटौती करने का प्रस्ताव नहीं है। इन सभी इंसेंटिव्स को पहले की तरह ही दिया जाता रहेगा।"
पिछले काफी दिनों से एक अफवाह उड़ाई जा रही है कि सरकार सरकारी कर्मचारियों के इंसेंटिव में कुछ कटौती करेगा और हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार यह खबर आई कि सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र कम करने वाली है। लेकिन इस पर भी सरकार ने सभी अफवाहों को खारिज करते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र कम करने की भी कोई योजना नहीं है। इन सब अफवाहों के बीच जितेंद्र सिंह जो कि राज्य कार्मिक मंत्रालय से संबंधित हैं उन्हें सामने आकर पूरी बात बतानी पड़ी। उनका यह कहना था कि "रिटायरमेंट की उम्र कम करने पर सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। सरकार के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है।" और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना महामारी के इस भयावह संकट को देखते हुए सरकार अपनी सभी कर्मचारियों की सुरक्षा का ध्यान रखेगी एवं हर मुमकिन उपाय करने के लिए तैयार रहेगी।
कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से कुछ राज्य सरकारों ने और केंद्र सरकार ने भी कटौती करने का ऐलान किया था। लेकिन अभी पिछले हफ्ते ही सरकार ने दा यानी कि महंगाई भत्ता बढ़ाने का जो फैसला लिया था उसे अभी जुलाई 2021 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
केंद्र सरकार के इस निर्णय पर बाद में यूपी सरकार ने भी महंगाई भत्ता नहीं बढ़ाने का निश्चय किया ऐसा करने से सरकारी खजाने में 10,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है।
चंद्रशेखर राव जो कि तेलंगाना के मुख्य मंत्री है उन्होंने राज्य के फाइनेंशियल सहायता के लिए विधायकों की 75 फ़ीसदी सैलरी काट रहे हैं। पूरे तेलंगाना के सभी नेता, विधायकों और स्थानीय निकायों के सभी सदस्यों की 75 फ़ीसदी सैलरी कट गई है। इतना ही नहीं पुलिस प्रशासन के सभी सिविल सर्वेंट्स, पुलिस और फॉरेन सर्विसेज के अफसर की सैलरी में भी 60 फ़ीसदी की कटौती की गई है। एवं पेंशनर्स के पेंशन में भी 50 फ़ीसदी की कमी करने का फैसला लिया है।
7 अप्रैल को केंद्र सरकार ने एक ऑर्डिनेंस जारी किया था जिसमें कहा था कि अगले 1 साल तक सांसदों की सैलरी में भी 30 फ़ीसदी कटौती की जाएगी। इस खबर की वजह से यह अफवाह सोशल मीडिया पर फैल रही थी कि सरकारी कर्मचारियों के इंसेंटिव्स में भी कटौती की जाएगी जो कि पूर्ण रूप से गलत है।

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