कोरोना महामारी के बीच कच्चे तेल के दामों में आयी ऐतिहासिक गिरावट, 0 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आए दाम
News: 20 अप्रैल सोमवार को कोरोना महामारी के भयावह संकट के बीच अमेरिकी कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट देखी गई। अब तक के इतिहास में यह सबसे बड़ी गिरावट है, जब न्यूयॉर्क में कच्चे तेल की कीमत इतनी कम हुई हो। डब्ल्यूटीआई यानी कि अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट ने का इतिहास में यह सबसे बुरा दिन था।
सोमवार को कच्चे तेल का भाव गिरकर $0 प्रति बैरल से भी बहुत कम हो गया। इतना कम कि वह शून्य से भी नीचे माइनस में प्रति बैरल के हिसाब से पहुंच गया। कच्चे तेल के कारोबार कि शुरुआत 18.27 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से हुई थी लेकिन यह इतिहास के सबसे कम दाम $1 तक पहुंची तथा उसके बाद शून्य हुई तत्पश्चात नेगेटिव में चली गई यह पहली बार हुआ है जब 1946 के बाद इतनी गिरावट देखी गई हो।
कच्चे तेल की डिमांड एवं उसके भंडारण में कमी आने की वजह से तेल की कीमतों में यह कमी आई। बता दें कि ओपेक जो कि तेल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है एवं वे देश जो उसकी सहायता करते हैं जैसे कि रूस यह देश पहले ही तेल के उत्पादन में रिकॉर्ड कमी लाने के लिए तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा अमेरिका और बाकी देश भी तेल उत्पादन में कमी करने का फैसला ले चुके थे। लेकिन कोरोना महामारी के चलते हैं इस उद्योग में बहुत नुकसान हुआ एवं यह धंधा बंद होने की वजह से तेल उत्पादन में बहुत ज्यादा कमी लाने के बावजूद भी इसकी डिमांड में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ। एवं अभी भी विश्व भर के इस्तेमाल की जरूरत से बहुत अधिक कच्चा तेल उपलब्ध है।
सोमवार को बाजार खोलने पर इसका भाव 10.34 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो कि 1986 के बाद का सबसे ज्यादा कम दाम था। कोरोनावायरस महामारी की वजह से विश्व भर में तेल की डिमांड घट गई है, उसी वजह से इसकी कीमतें लगातार गिर रही है।
जानकारी के लिए बता दें कि ग्रीनविच मीन टाइम यानी कि वैश्विक मानक समय के मुताबिक दोपहर 3:00 बजे यानी कि भारतीय समय रात 8:30 बजे इसमें कुछ सुधार देखा गया था। और यह 10.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था। लेकिन फिर भी यह शुक्रवार के तेल की कीमतों के मुकाबले में 41% तक कम था। व्यापारियों ने बताया कि कीमतों का इतना गिरना बहुत ही चिंता का विषय है। क्यूंकि मई डिलीवरी के अनुबंधों का निस्तारण सोमवार शाम तक किया जाना है लेकिन अभी तक कोई निवेशक तेल की वास्तविक डिलीवरी लेना ही नहीं चाह रहे हैं।
सोमवार को कच्चे तेल का भाव गिरकर $0 प्रति बैरल से भी बहुत कम हो गया। इतना कम कि वह शून्य से भी नीचे माइनस में प्रति बैरल के हिसाब से पहुंच गया। कच्चे तेल के कारोबार कि शुरुआत 18.27 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से हुई थी लेकिन यह इतिहास के सबसे कम दाम $1 तक पहुंची तथा उसके बाद शून्य हुई तत्पश्चात नेगेटिव में चली गई यह पहली बार हुआ है जब 1946 के बाद इतनी गिरावट देखी गई हो।
कच्चे तेल की डिमांड एवं उसके भंडारण में कमी आने की वजह से तेल की कीमतों में यह कमी आई। बता दें कि ओपेक जो कि तेल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है एवं वे देश जो उसकी सहायता करते हैं जैसे कि रूस यह देश पहले ही तेल के उत्पादन में रिकॉर्ड कमी लाने के लिए तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा अमेरिका और बाकी देश भी तेल उत्पादन में कमी करने का फैसला ले चुके थे। लेकिन कोरोना महामारी के चलते हैं इस उद्योग में बहुत नुकसान हुआ एवं यह धंधा बंद होने की वजह से तेल उत्पादन में बहुत ज्यादा कमी लाने के बावजूद भी इसकी डिमांड में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ। एवं अभी भी विश्व भर के इस्तेमाल की जरूरत से बहुत अधिक कच्चा तेल उपलब्ध है।
सोमवार को बाजार खोलने पर इसका भाव 10.34 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो कि 1986 के बाद का सबसे ज्यादा कम दाम था। कोरोनावायरस महामारी की वजह से विश्व भर में तेल की डिमांड घट गई है, उसी वजह से इसकी कीमतें लगातार गिर रही है।
जानकारी के लिए बता दें कि ग्रीनविच मीन टाइम यानी कि वैश्विक मानक समय के मुताबिक दोपहर 3:00 बजे यानी कि भारतीय समय रात 8:30 बजे इसमें कुछ सुधार देखा गया था। और यह 10.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था। लेकिन फिर भी यह शुक्रवार के तेल की कीमतों के मुकाबले में 41% तक कम था। व्यापारियों ने बताया कि कीमतों का इतना गिरना बहुत ही चिंता का विषय है। क्यूंकि मई डिलीवरी के अनुबंधों का निस्तारण सोमवार शाम तक किया जाना है लेकिन अभी तक कोई निवेशक तेल की वास्तविक डिलीवरी लेना ही नहीं चाह रहे हैं।

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