News: हर तरफ कोरोना वायरस का हाहाकार मचा हुआ है। इसके संक्रमण के फैलने के कारण दुनिया में कई देशों की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है। देश में कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन घोषित कर दिया गया है। और इसके साथ ही बहुत सारे नियमों में भी कई बदलाव किए गए हैं। इन नियमों में एक बदलाव यह भी हुआ है कि कंपनियों को अपने नतीजों को घोषित करने के लिए छूट भी दी गई है। सेबी ने कंपनी के प्रमोटर और इंसाइडर्स 30 जून तक शेयर नहीं खरीदने के लिए कहा है।
कई बड़ी-बड़ी कंपनियों ने नतीजे को घोषित न करने पर लगने वाले प्रतिबंध से छूट की भी मांग की है जिसे सेबी ने इंकार कर दिया है।
हाल ही में रेगुलेटर ने कुछ चुनिंदा कंपनियों को चौथी तिमाही और अपनी सालाना कमाई को 31 मई को घोषित करने के बजाय 30 जून तक घोषित करने की अनुमति दे दी है। उसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद एक अप्रैल से 48 घंटे तक प्रमोटर और कंपनी इंसाइडर्स यानी कि मैनेजमेंट के लिए ट्रेडिंग विंडो बंद करनी ही होगी।
कंपनी का मैनेजमेंट जिसमें कि प्रमोटर और इंसाइडर आते हैं उनके पास फिस्कल ईयर 2020 में कोई भी ऐसे जानकारी हो सकती है जिसका वह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
सेबी के एक अधिकारी ने यह बताया है कि शेयर की ट्रेडिंग की तारीख को न बढ़ाने की वजह यह है कि कंपनी के मैनेजमेंट और दूसरी फर्मों के पास ऐसी कोई भी जानकारी हो सकती है जिससे कि इंसाइडर ट्रेडिंग पर मुश्किल आ सकती है। इन्हीं सब कारणों को देखते हुए इस पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। जानकारी के लिए बता दें कि सेबी के नियमों के अनुसार कंपनियों को फिसकल ईयर 2020 के आखिरी के 60 दिनों के अंदर स्टॉक एक्सचेंज को अपनी रिपोर्ट आवश्यक है।
एक ओर इस संदर्भ में कंपनियों का यह बयान आया है कि सेबी के उनकी मांग पर मनाई करने से प्रमोटर और इनसाइडर ट्रेडिंग का प्रतिबंध और भी ज्यादा बढ़ जाएगा, जो पहले ही फिस्कल ईयर के लगभग 7 महीने मतलब कि 202 दिन के लिए लागू किया जाता है। वहीं दूसरी ओर दिग्गज जानकारों ने बताया है कि सेबी को इस तरह के नियम कानून में कंपनियों को ढील देनी ही चाहिए, उन्हें इस प्रकार की कुछ रियायत अवश्य दें जिससे कि स्टेक होल्डर निर्धारित कानून से अपने एसेट को लिक्विडेट कर सकें।

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