अभी-अभी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी कि आरबीआई से आ रही खबरों के अनुसार 10 बैंकों का विलय कर 4 बड़े बैंक बनाने की अधिसूचना जारी की गई है। आरबीआई अधिसूचना के अनुसार 10 बैंकों को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाने का फैसला लिया गया है। इन बैंकों में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की जो शाखाएं हैं वे अब से पंजाब नेशनल बैंक की शाखाओं के रूप में देखी जाएंगी। वहीं दूसरी ओर सिंडीकेट बैंक अब से केनरा बैंक की शाखा के रूप में काम करेगा।
आने वाली 1 अप्रैल से देश के कुछ बैंको में बदलाव देखने को मिलेगा। क्यूंकि देश के 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनाने का फैसला लिया गया है। माना जा रहा है कि इन 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनेंगे जो कि अब तक का भारत के वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा विलय होने वाला है। शनिवार को जारी कि अधिसूचना इस महीने की शुरुआत में जारी की गई एक अन्य अधिसूचना के माध्यम से लागू हो जाएगी।
ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की जो शाखाएं हैं वे अब से पंजाब नेशनल बैंक की शाखाओं के रूप में देखी जाएंगी वहीं दूसरी ओर सिंडीकेट बैंक अब से केनरा बैंक की शाखा के रूप में काम करेगा। और बताया जा रहा है कि आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक कि शाखाएं जारी अधिसूचना के बाद अब से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं के रूप में काम करेगी। जबकि अलाहाबाद बैंक कि शाखाएं इंडियन बैंक की शाखाओं के रूप में काम करेगी। हालांकि इस विलय का बैंक एम्पलॉइज यूनियंस एवम् एसोसिएशन्स ने भारी विरोध किया कि इस विलय को स्थगित कर दिया जाए क्योंकि लॉक डाउन के चलते इस समय जन धन योजना के तहत अकाउंट होल्डर्स को सरकारी फायदा दे पाना एक तरह से बहुत बड़ी चुनौती के रूप में उभरेगा।
आरबीआई के द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति
योगेश दयाल जिनकी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक है, उनके द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार 1 अप्रैल से इलाहाबाद बैंक के सभी खाताधारक और जमाकर्ता इंडियन बैंक के ग्राहक के रूप में माने जाएंगे। इसी के साथ केंद्रीय बैंक की जारी एक अन्य विज्ञप्ति के अनुसार आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक के सभी खाताधारक और जमाकर्ता 1 अप्रैल से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के ग्राहक के तौर पर माने जाएंगे।केंद्र सरकार द्वारा लिया गया था फैसला
देश में विश्वस्तरीय तरह बड़े बैंक बनाने के लिहाज़ से केंद्र सरकार ने 10 सार्वजनिक बैंकों को विलय करके 4 बड़े बैंक बनाने का फैसला लिया था।बैंको के विलय की जो यह योजना है वह सबसे पहले दिसंबर 2018 में पेश की गई थी। तब यह अनुमान लगाया जा रहा था कि अगर देश के सरकारी बैंकों को मिलाकर बन बैंक से हमें अच्छे परिणाम मिलते है तो भारत के कुछ बैंक भी विश्व स्तर के बैंको में शुमार हो सकते है।

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